वक़्त ही वक़्त कमबख्त ! हास्य कविता,व्यंग्य,शायरी व अन्य दिमागी खुराफतों का संकलन (Majaal)

वक़्त ही वक़्त कमबख्त है भाई, क्या कीजे गर न कीजे कविताई !

Tuesday, November 30, 2010

चाचा चौधरी का दिमाग कम्पूटर से भी तेज़ चलता है !

›
कुछ उन्मुक्त क्षणिकाएँ समझ लीजिये, या बे-बहरिया त्रिवेणी; या फिर फुरसतिया दिमाग की खुराफाती तबीयत का नतीजा मान कर ही झेल जाइए ....   1. दु...
10 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
Manish aka Manu Majaal
View my complete profile
Powered by Blogger.