वक़्त ही वक़्त कमबख्त ! हास्य कविता,व्यंग्य,शायरी व अन्य दिमागी खुराफतों का संकलन (Majaal)
वक़्त ही वक़्त कमबख्त है भाई, क्या कीजे गर न कीजे कविताई !
Thursday, December 23, 2010
हास्य : प्यार, मोहब्बत और शायरी-ए-Fusion ( Shayari - Majaal )
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जितना पुराना, उतना divine , प्यार है गोया कोई wine ! जबतक बच्चों को लगे न रोग, तब तक इश्कबाजी है fine ! प्यार की कीमत पता चली, bla...
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