वक़्त ही वक़्त कमबख्त है भाई, क्या कीजे गर न कीजे कविताई !
Friday, August 28, 2026
Synopsis : तदात्मानं सृजाम्यहम् - A Psychological Philosophical Thriller
Friday, May 15, 2026
!! Fictional-o-Graphy - Coming Soon ... !!
Tuesday, April 28, 2026
या खुदा! ये मांजरा क्या है..?
Saturday, April 18, 2026
Tennis Documentary - Promo
Tuesday, March 17, 2026
V४ क्रांति - अंदाज़-ए-बयाँ और.....!
तो प्रस्तुत है — हिंदी फोरम मंच पर एक नई पहल “चर्चा मंच” - V४ क्रांति - ग़ालिब का अंदाज़-ए-बयाँ आखिर यूँ ही नहीं राजनीगंधा बन जावत है ससुरा ...!
यह केवल एक मंच नहीं, बल्कि विचारों का संगम है… जहाँ हम सभी — ब्लॉगर भाईलोग, लेखक मित्र, और जो भी समसामयिक विषयों पर अपनी दृष्टि रखते हैं — एक साथ आकर अपने विचार साझा करेंगे।
क्या होगा यहाँ? सरल सा है —
👉 अलग-अलग समसामयिक विषयों पर आप सभी को आमंत्रित किया जाएगा
👉 आप अपने विचार वीडियो के माध्यम से साझा करेंगे
👉 उन विचारों को हम सहेजकर, संवारकर एक पॉडकास्ट रूप देंगे
👉 और फिर उसे YouTube पर प्रस्तुत करेंगे
मतलब… आपकी आवाज़, आपका विचार — एक बड़े मंच तक पहुँचेगा।
क्यों?
क्योंकि अब समय है सिर्फ लिखने का नहीं, विचारों को प्रवाहित करने का
समय है संवाद का, सहभागिता का, और एक सच्ची “विचार क्रांति” का।
तो अपील है —
सभी लेखक, ब्लॉगर, और जो भी सोचते हैं कि उनके पास कहने को कुछ है…
आपका स्वागत है 🙌
आपका सहयोग ही इस पहल को दिशा देगा, और ऊर्जा भी।
आइए, मिलकर एक नई लहर शुरू करें —
“विचार क्रांति — v4 क्रांति” 🔥
बाकी बातें… अब मंच पर होंगी 😉 जल्द मिलते हैं, अपने विचारों के साथ!
जय हो !
Wednesday, December 31, 2025
थाली में सिर्फ रोटी और अचार था...!!! : New Year Funny Shayari (मजाल )
Monday, November 10, 2025
!!!! बटुक सप्ताह - बाल दिवस विशेष !!! १४ नवंबर २०२५ !!!
Tuesday, July 8, 2025
Marriage Anniversary Special - 'म-जारा'-ए-marriage (मजाल) (Chat-GPT के सौजन्य-ए-जुगलबंदी से !)
Saturday, June 14, 2025
!!! हिन्दी दिवस महा-कुंभ (04-06-2025 से 14-09 -2025 तक !!!! - !!! जीतिए रु.1,00,000/- तक के नकद पुरस्कार !!!
!!! 80 दिन शेष !!!
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!!! प्रत्येक Approved Participation के लिए Guaranteed Gift !!!
• श्रेणी 1 - स्वरचित कविता/गीत + AI Music Composition
viewtopic.php?t=4558
• श्रेणी 2 – हिन्दी की प्रसिद्ध रचनाओं (गीत/कविता/भजन/दोहे आदि) + AI Music Composition
posting.php?mode=edit&p=14561
• श्रेणी 3 - स्वरचित कथा/कविता/लेख
viewtopic.php?t=4560
• श्रेणी 4 - विश्व साहित्य (कथा/कविता/लेख) का हिन्दी देवनागरी में रूपांतरण (स्वयं द्वारा सत्यापित)
viewtopic.php?t=4561
Wednesday, June 4, 2025
'यदि' - Rudyard Kipling's Poem 'If" का हिन्दी भावार्थ !
Tuesday, February 25, 2025
अपन इंदौरी मासिक पत्रिका के लिए लेख, लघु कथा और कविता आमंत्रित है !!!
Monday, September 2, 2024
हिन्दी डिस्कशन फोरम (www.HindiDiscussionForum.com) - हिन्दी प्रेमियों को एक सूत्र में पिरोने की सुभावना और एक पुरानी खुजाल की कमबैक !
Tuesday, July 16, 2024
हास्य कविता - जन्मदिन की बधाई!
आई 16 जुलाई
बधाई हो बधाई,
तो बोले वो हमसे,
काहे की बधाई?
आई (मदर इन मराठी)16 जूं-लाई
16 से 100 हुए भाई,
डैंड्रफ दियो बढ़ाई,
गिर गए बाल, भाई,
काहे की बधाई?!
तब हम उन्हें समझाई,
व्हाट आई मीन टू से इज,
टुडे इस दी 16th ऑफ़ जुलाई,
हैप्पी बर्थडे टू यू पाई !
आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं l
Enjoy!
Sunday, July 7, 2024
कविता - यह 'कुछ', ही 'सब-कुछ' है .. !
लम्हा ऐसा भी आता है,
अंतिम लगता है सबकुछ जब,
किन्तु फिर कुछ बच जाता है.
जीवित है की मृत मरा नहीं,
प्रमाण यही तो अवगत है,
जीवन जीने का इच्छुक है,
बाकी बचा कहीं कुछ है,
(और ) सच जान इसे तू मेरे प्रिय !
यह 'कुछ', ही 'सब-कुछ' है .. !
निराशा-बादल के भीतर ,
आशा-बूँदें भी शामिल है,
हर पल,हर घड़ी , हर एक लम्हा,
मौका बनने के काबिल है.
गहरी बदरी जितनी उतनी,
मूसला-बारिश के लक्षण है,
हर अनुभव बन कर नसीहत,
कुछ सिखलाने में सक्षम है !
हर ख्व्वाब, हर एक तेरा सपना,
पूरा जीने के लायक है,
सच जान इसे तू, मेरे प्रिय !
(ये) सपने ही असल हकीकत है !
ये स्वप्न यहीं दर्शाते की,
जीवन जीने का इच्छुक है,
बाकी बचा कहीं कुछ है,
(और) सच जान इसे तू , मेरे प्रिय !
यह 'कुछ', ही 'सब-कुछ' है .. !
Sunday, March 17, 2019
हास्य नाटक - 'कचौड़ी योग'
उसका शीर्षक है - “कचौड़ी योग!” आप सभी लोगों ने नाटक के शीर्षक से यह अंदाजा लगा
ही लिया होगा किए एक हास्य रस प्रधान नाटक है| पहले हम लोग थोड़ी उलझन में थे की
योग के मंच में हास्य रस प्रधान नाटक का मंचन उचित होगा या नहीं परंतु जैसा कि बड़े बड़े
कलाकार यह एक मत रखते हैं कि “हास्य एक बहुत ही गंभीर विषय है”, इसलिए हमने इसी
विचार को आधार बनाकर योग जैसे गंभीर विषय को हल्के फुल्के तरीके से पेश करने
का प्रयास किया है|
चाहते हैं कि योग जैसे गंभीर समझे जाने वाले विषय को एक सरल और मनोरंजक तरीके से
पेश किया जाए ताकि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच पाए और उन्हें लाभान्वित कर पाए|
हैं | सारी दुकानें बंद है |मन ही मन बड़बड़ता है , “ आज अपना कचोरी खाने का योग
बनता नहीं दिखता…|”
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यूं ही ध्यान लगाए समाधि में बैठे देखा है| क्या लगता है, तब तक पूरी हो पाएगी
महाराज की समाधि?
होता है…. योग न आए, तो चाहे बरसों माथा रगड़ों - कुछ हाथ ना लगे और जो
उचित योग आ जाए, तो ज्ञान मिल जाए - इसी क्षण.. ! सब प्रभु कृपा पर ही निर्भर है…”
कृपा भी कब, किसपे और क्यों हो जाए, ये कोई नहीं बता सकता…!”
हो गई है लोग एक-एक करके उनके दर्शन करने और अपनी समस्या बताने आने ल
गते हैं| पहले एक को कुबड़ी धीरे धीरे उनके पास आती है|)
खड़ा हुआ जाता है| अब आप ही कुछ करिए बाबा ….”
हो…” करते-करते खुशी से चला जाता है)
लेकर कल पधारें.. जय हो बाबा जी की जय हो..|”
करने चले जाते हैं | दृश्य 2 की समाप्ति | }
गीत शुरू ... )
कोरस का प्रवेश|
नाचते-नाचते इंदौरी लाल से टकराते हैं)
(इंदौरी लाल के पेट में जोरों से दर्द होता है और वो मूर्छित हो कर गिर जाता है |)
नहीं है, जो मैंने किताबों में पढ़ा है, ये कुछ वास्तविक और आतंरिक अनुभूति है...... ये
इंदौरी लाल अज्ञानी जरूर है, मगर स्वाभिक, मनमौजी और सरल व्यक्ति है |
अज्ञानियों में इससे बेहतर पात्र ढूँढना संभव नहीं लगता ...| पर
उठता है .... )
के साथ दृश्य एवं नाटक की समाप्ति }

