Saturday, October 30, 2010

एक गीत - ' जान लेगा कभी ... '

कठिनाई की डगर,
मुश्किलों का सफ़र,
बनके यादें शहद,
देंगी मीठा असर.


जान लेगा कभी,
काम का है सबर.
आप ही कभी खुद, 
करने लगेगा कदर.


आज सोचे जो तू,
है ये सब बेसबब,
जान लेगा कभी,
काम आए हर सबक.

दुनिया में ये जहर,
सब तरफ बस कहर,
दिखता है जो तुझे,
हर पल, हर पहर.
कोई भी ये नज़र,
न बुरी इस कदर,
बात की पूरी जब ,
तुझको होगी खबर.
अपनों के ही लिए,
है ये सारी फिकर,
जान लेगा कभी,
बिन किये ये जिकर...  

खुली हुई नज़र,
से तू देखे अगर,
जान लेगा कभी,
राज़ ये हमसफ़र.
चाहे जितना ग़दर,
चाहे जितना कहर,
दुनिया में है भरा, 
चाहे जितना ज़हर,
प्यार से ही मगर,
बसते सारे नगर,
है जो भी आज तू,
वो बस दुआ का असर

अपनों के ही लिए,
है ये सारी फिकर,
जान लेगा कभी,
बिन किये ये जिकर ....

4 comments:

अशोक बजाज said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

ali said...

अपनों के ही लिए,
है ये सारी फिकर,
जान लेगा कभी,
बिन किये ये जिकर ....


सहमत !

संजय कुमार चौरसिया said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

Majaal said...

आप सभी का आभार ...

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