Sunday, November 21, 2010

बाल-कविता (हास्य) : आँकड़ेबाजी ( Bal Hasya Kavita - Majaal )

थोड़ी आँकड़ेबाजी, थोडा हास्य, थोडा दर्शन, और थोड़ा बचपना ....

एक बार की है बात,
छोटू और सच, दोनों साथ.
झूठ ने आ कर किया कबाड़ा,
तीन तिगाड़ा, काम बिगाड़ा !
छोटू बोले झूठे भाई,
आओ बैठो चारपाई.
झूठ बोला नहीं रे यारा,
चाहूँ सुविधा पाँच सितारा !
छोटू सोचा इतना नखरा,
झूठ का अंदाज़ उसको अखरा.
पहले रह गया हक्का बक्का,
फिर छोटू ने मारा छक्का !
भाई तुम मेरा  निभाना,
माँ देती खर्चा बस आठ आना !
ये सुन झूठ ने किया बहाना,
और हो गया वो नौ दो ग्याहरह !
सच छोटू का सच्चा संगी,
झूठ  तो निकला दस नंबरी !
सच और छोटू हमेशा यारा,
और जिंदगी के हुए पौ बारह !

8 comments:

Anjana (Gudia) said...

achchi seekh deni waali sachchi rachna! :-)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बच्चॊं को बड़ी पसन्द आयेगी.

muskan said...

सुन्दर रचना...

शरद कोकास said...

बारह तक की गिनती याद हो गई ।

Majaal said...

आप सभी का ब्लॉग पर पधारने के लिए आभार ....

ali said...

अच्छी बाल कविता !

तुषार राज रस्तोगी said...

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी इस विशेष प्रस्तुति को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ( १९ अप्रैल, २०१३, शुक्रवार ) ब्लॉग बुलेटिन - रसीले रंगीले हास्य से भरे काइकू पर स्थान दिया है | हार्दिक बधाई |

कालीपद प्रसाद said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
latest post तुम अनन्त

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